उत्तराखंड उच्च न्यायालय का कड़ा निर्देश: नैनीताल के बाढ़ प्रभावित चुकम गाँव के निवासियों के पुनर्वास में लाई जाए तेजी

उत्तराखंड उच्च न्यायालय का कड़ा निर्देश: नैनीताल के बाढ़ प्रभावित चुकम गाँव के निवासियों के पुनर्वास में लाई जाए तेजी
रामनगर (संजय बिष्ट)- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रामनगर तहसील के आपदा और बाढ़ से प्रभावित चुकम गाँव (Village Chukam) और अमरपुर के कुछ हिस्सों के निवासियों के पुनर्वास मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर वन भूमि डायवर्जन (forest land diversion) का प्रस्ताव तैयार कर ‘परिवेश पोर्टल’ (PARIVESH portal) पर अपलोड करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता गंगा सिंह नेगी , जसी राम व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिका में ग्रामीणों के अशिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने कोर्ट को बताया कि कोसी नदी में आई बाढ़ के कारण चुकम गाँव की कुल भूमि का 60-70% हिस्सा बह चुका है। चूँकि यह गाँव जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के बेहद करीब स्थित है, इसलिए यहाँ मानव-वन्यजीव संघर्ष (human-animal conflict) का गंभीर खतरा भी मंडरा रहा है। भूवैज्ञानिकों (Geologists) ने भी चेतावनी दी है कि यह गाँव अब मानव बसावट के लिए सुरक्षित नहीं है और यहाँ कभी भी कोई बड़ी आपदा आ सकती है।
सरकार ने दी परिवारों और पुनर्वास की जानकारी
राज्य के वकील ने अदालत को बताया कि चुकाम गाँव में कुल 97 परिवार रहते हैं:
इनमें अनुसूचित जाति (SC) के 45 परिवार हैं, जिनमें से 22 अनधिकृत कब्जाधारी (unauthorized occupants) पाए गए।
सामान्य श्रेणी के 52 परिवारों में से 44 अपनी भूमि के वैध मालिक हैं, जबकि 8 अनधिकृत रूप से रह रहे हैं।
प्रस्ताव के तहत, जिन लोगों के पास भूमि का वैध मालिकाना हक है, उन्हें किसी अन्य स्थान पर उतनी ही भूमि आवंटित की जाएगी, जबकि अनधिकृत कब्जाधारियों को आवासीय उद्देश्य के लिए 250 वर्ग मीटर जमीन दी जाएगी। इस पुनर्वास के लिए आमपोखरा रेंज के प्लॉट संख्या 50 की 45 हेक्टेयर वन भूमि की पहचान की गई है।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि वर्ष 1993 से फाइलें चल रही हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि:
उत्तराखंड सरकार के वन सचिव चार सप्ताह के भीतर वन भूमि डायवर्जन का प्रस्ताव ‘परिवेश पोर्टल’ पर अपलोड करें।
सक्षम प्राधिकारी/क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति (Regional Empowered Committee) पोर्टल पर प्रस्ताव अपलोड होने की तिथि से तीन महीने के भीतर नियमानुसार उचित आदेश पारित करे।
इसके तुरंत बाद, राज्य सरकार बिना किसी और देरी के चुकम और अमरपुर के निवासियों के उचित स्थानों पर पुनर्वास के लिए प्रभावी कदम उठाए।







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