आत्मनिर्भर भारत: मजबूत विनिर्माण और नए विचारों से आगे बढ़ता देश- पद्मश्री जय प्रकाश अग्रवाल, चेयरमैन, सूर्या रोशनी लिमिटेड

आत्मनिर्भर भारत: मजबूत विनिर्माण और नए विचारों से आगे बढ़ता देश- पद्मश्री जय प्रकाश अग्रवाल, चेयरमैन, सूर्या रोशनी लिमिटेड
पिछले 50 वर्षों से सूर्या रोशनी भारत की भरोसेमंद निर्माण कंपनियों में से एक रही है। कंपनी लाइटिंग, वायर और केबल, पंखे, घरेलू उपकरण, पीवीसी पाइप, वॉटर पंप, पानी की टंकियां और स्टील पाइप जैसे कई क्षेत्रों में काम कर रही है। लेकिन किसी भी पुरानी और अनुभवी निर्माण कंपनी की पहचान सिर्फ इस बात से नहीं होती कि वह क्या बनाती है, बल्कि इस बात पर भी कि उससे देश की अर्थव्यवस्था, समाज और आत्मनिर्भर भारत की सोच को कितना फायदा मिलता है। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आत्मनिर्भर भारत का विचार एक बार फिर महत्वपूर्ण हो जाता है।
एक दशक से ज्यादा समय पहले जब मेक इन इंडिया की शुरुआत हुई, तो इसने भारतीय उद्योग को सिर्फ एक नारा नहीं दिया, बल्कि आगे बढ़ने की एक दिशा दी। आत्मनिर्भर भारत ने इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए देश में ही चीजें बनाने और कंपनियों को अपने स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। सूर्या के लिए आत्मनिर्भरता कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह हमेशा से हमारी सोच का हिस्सा रही है।
कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक, उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए सूर्या के मालानपुर, काशीपुर, बहादुरगढ़, हिंदूपुर और अंजार में पांच निर्माण केंद्र हैं। इससे बाहर से आने वाली चीजों पर हमारी निर्भरता कम होती है और किसी भी मुश्किल समय में उत्पादन जारी रखने में मदद मिलती है। सूर्या टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन सेंटर ने भी बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच उत्पादों की गुणवत्ता और एकरूपता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।
लेकिन सिर्फ सरकारी नीतियों से आत्मनिर्भरता पूरी नहीं हो सकती। सरकार नीतियां और सुविधाएं देती है, कंपनियां उत्पादन की क्षमता तैयार करती हैं और आम लोग देश में बने उत्पादों को चुनकर इस पूरी सोच को आगे बढ़ाते हैं।
जब कोई भारतीय कारखाना पूरी क्षमता से काम करता है, देश में ही जरूरी सामान और हिस्से तैयार करता है और 50 से ज्यादा देशों में अपने उत्पाद भेजता है, तो उसकी असली सफलता तब होती है जब भारत के लोग भी उन उत्पादों पर भरोसा करें और उन्हें अपनाएं। यही वह जगह है जहां नीति एक रोजमर्रा के फैसले में बदल जाती है। हर बार देश में बने किसी उत्पाद को चुनना, देश के उद्योग और उत्पादन व्यवस्था को मजबूत करने में अपना योगदान देना है।
दुनिया में हो रहे बदलावों ने इस चुनाव को और अहम बना दिया है
हाल के वर्षों में जहाजों के रास्तों में बदलाव, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और दुनिया भर में जरूरी सामान की आपूर्ति में आई रुकावटों ने यह साफ कर दिया है कि दूसरे देशों से जरूरत से ज्यादा सामान मंगाने पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। मुश्किल समय में बाहर से आने वाले सामान की कीमत और उपलब्धता अचानक बदल सकती है।
ऐसे समय में देश के भीतर मजबूत उत्पादन व्यवस्था, कम ऊर्जा खर्च करने वाले कारखाने और संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल यह सुनिश्चित करते हैं कि जरूरी सामान देश के घरों और उद्योगों तक पहुंचता रहे।
लंबे समय तक मजबूत बने रहने की क्षमता एक-दो साल में तैयार नहीं होती। इसके लिए वर्षों तक देश में उत्पादन बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर क्षमता विकसित करने, पर्यावरण का ध्यान रखने और लगातार अच्छी गुणवत्ता बनाए रखने में निवेश करना पड़ता है।
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस का यह अवसर हमें याद दिलाता है कि देश को मजबूत बनाने का काम सिर्फ सरकारी नीतियों से नहीं होता। यह उन क्षमताओं से भी होता है जिन्हें हम देश में तैयार करते हैं और उन फैसलों से भी, जो हम रोजमर्रा की जिंदगी में लेते हैं।
एक उद्योग और एक देश के रूप में हमारे सामने रास्ता साफ है—देश को मजबूत बनाने का यह सफर हम सभी मिलकर, एक-एक उत्पाद के चुनाव के साथ आगे बढ़ा सकते हैं।


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