संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, ट्रैक्टर-ट्रॉली और भैंसा-बुग्गियों से खनन सामग्री का धड़ल्ले से परिवहन
धनौरी (श्रवण गिरी)- धनौरी क्षेत्र में खनन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में खनन कारोबार से जुड़े वाहन स्कूल-कॉलेज के समय भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं। खनन सामग्री से लदी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और भैंसा-बुग्गियां सड़कों पर नजर आ रही हैं, जिससे आम राहगीरों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार सुबह स्कूल-कॉलेज जाने तथा दोपहर में छुट्टी के समय सड़कों पर विद्यार्थियों की आवाजाही काफी अधिक रहती है। इसके बावजूद खनन सामग्री से भरे वाहन इन मार्गों से गुजरते हैं। लोगों का कहना है कि भारी और ओवरलोड वाहनों के कारण सड़क दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
आखिर किसकी शह पर चल रहा कारोबार?
क्षेत्रवासियों का सबसे बड़ा सवाल संबंधित विभाग की निगरानी को लेकर है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि क्षेत्र में खुलेआम खनन सामग्री का परिवहन हो रहा है तो जिम्मेदार विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं है? वहीं यह भी जांच का विषय है कि जिन वाहनों से खनन सामग्री का परिवहन किया जा रहा है, उनके पास वैध रवन्ना, अनुमति और निर्धारित क्षमता के अनुसार लोड है या नहीं।
उत्तराखंड में अवैध खनन, अवैध परिवहन और अवैध भंडारण की रोकथाम के लिए बाकायदा नियमावली लागू है।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा बनी चिंता
ग्रामीणों ने कहा कि स्कूल-कॉलेज के समय भारी वाहनों की आवाजाही पर विशेष निगरानी होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा।
जांच हुई तो खुल सकता है बड़ा खेल
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से धनौरी क्षेत्र में विशेष जांच अभियान चलाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि खनन स्थलों, वाहनों के रवन्ने, वाहन क्षमता, ओवरलोडिंग तथा खनन सामग्री के स्रोत की जांच की जाए। यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो संबंधित लोगों और वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि धनौरी क्षेत्र में चल रहे कथित खनन कारोबार को लेकर संबंधित विभाग कब जांच करता है और क्या कार्रवाई होती है।